विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, सेप्सिस (पूतिता) विश्व में होने वाली मौतों के सबसे आम कारणों में से एक है। 2020 में प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, विश्व भर में सेप्सिस के 48.9 मिलियन मामले हुए थे, और इस से संबंधित 11 मिलियन मौतें हुईं थीं, जो वैश्विक स्तर पर होने वाली कुल मौतों का 20% है। इसलिए यह समझना ज़रूरी है कि सेप्सिस क्या है, किन लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए और इसका समय पर इलाज करने के लिए क्या करना चाहिए।
सेप्सिस एक गंभीर और संभावित रूप से जानलेवा स्थिति है जो तब होती है जब किसी संक्रमण के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया नियंत्रण एकदम बेकाबू हो जाती है, जिससे शरीर में व्यापक सूजन होती है और अंगों में क्षति होती है और वे ठीक से काम नहीं करते। चूँकि सेप्सिस तेज़ी से बढ़ सकता है, इसलिए यह अत्यंत आवश्यक है कि सेप्सिस की पहचान शुरुआती अवस्था में हो जाए ताकि इसका समय पर इलाज हो पाए। पर अफसोस, बहुत से लोग सेप्सिस के बारे में अनजान हैं और यह नहीं जानते कि यह कैसे विकसित होता है, और किन लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए।
सेप्सिस क्या है?
सेप्सिस एक जानलेवा चिकित्सीय स्थिति है जिसमें हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अत्यधिक सक्रिय हो जाती है और संक्रमण से लड़ने की कोशिश में उसकी प्रतिक्रिया अत्यधिक और बेकाबू हो जाती है। स्थिति इतनी बिगड़ जाती है कि अंग ठीक से काम करना बंद कर देते हैं। हमारी प्रतिरक्षा तंत्र की यह प्रतिक्रिया हमारे ही ऊतकों और अंगों को नुकसान पहुँचाती है, और अगर समय पर इसका इलाज न किया जाए तो इससे सदमे, कई अंगों की विफलता और कभी-कभी मृत्यु भी हो सकती है।
सेप्सिस का कारण क्या है?
कोई भी संक्रमण सेप्सिस का कारण बन सकता है। सबसे आम संक्रमण हैं - निमोनिया, मूत्र मार्ग में संक्रमण (यूटीआई), त्वचा में संक्रमण, या पेट में संक्रमण (पेरिटोनाइटिस, अपेंडिसाइटिस, पित्ताशय की सूजन/संक्रमण) और मस्तिष्क में संक्रमण। आमतौर पर इसके लिए बैक्टीरिया ज़िम्मेदार होते हैं, लेकिन वायरस, पैरासाइट (परजीवी) और फंगस (कवक) भी इसे ट्रिगर कर सकते हैं।
सेप्सिस कितना आम है?
आप शायद सोच रहे होंगे कि गंभीर बीमारियों में आपने हृदयरोग या कैंसर या डिमेंशिया के नाम तो सुने हैं, पर सेप्सिस के बारे में उतना नहीं सुना है। क्योंकि सेप्सिस बहुत जल्दी बढ़ता है, गंभीर स्थितियों में इस से मौत भी जल्दी होती है, और इसका इलाज तुरंत और गहन होता है, और यह अकसर अन्य गंभीर रोग वालों को हो सकता है (क्योंकि उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर है), इसलिए शायद इस पर कम चर्चा होती है।
सच तो यह है कि सेप्सिस दुनिया भर में मौत के सबसे आम कारणों में से एक है। भारत में सेप्सिस एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है। इंडियास्पेंड की 2025 की रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, इन्टेन्सिव केयर यूनिट (आईसीयू, गहन चिकित्सा इकाई) में भर्ती हर दो में से एक मरीज को सेप्सिस था और उनमें से 27.6% की मृत्यु हो गई। 2017 के एक अध्ययन में यह अनुमान लगाया गया था कि भारत में सेप्सिस के 1.13 करोड़ मामले हुए थे और उस में से 29 लाख मामलों में मृत्यु हुई थी। अमेरिका के राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान (एनआईएच) के जर्नल में प्रकाशित 2024 के एक अध्ययन में कहा गया है कि सेप्सिस के मरीजों की मृत्यु दर 36.3%, और सेप्टिक शॉक की मृत्यु दर 50.8% थी।
सेप्सिस का खतरा किसे ज़्यादा होता है?
सेप्सिस किसी भी उम्र के लोगों को हो सकता है, लेकिन कुछ आयु वर्ग और लोगों में इसका खतरा ज़्यादा होता है, जैसे:
- शिशु (1 वर्ष से कम उम्र के शिशु), नवजात शिशु, या समय से पहले जन्मे शिशु
- 65 वर्ष से अधिक आयु के वयस्क
- अस्पताल में भर्ती लोग
- मधुमेह, क्रोनिक किडनी रोग, सिरोसिस आदि जैसे किसी क्रानिक रोग वाले लोग
- ऐसे लोग जिन्हें किसी चिकित्सा समस्या के कारण मूत्र कैथेटर लगा है या लॉंग-टर्म आईवी लाइन लगी है
- ऑपरेशन के बाद की अवस्था वाले लोग (पोस्ट-ऑपरेटिव)
- गंभीर आघात के बाद
- कमज़ोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग, जैसे एचआईवी या कैंसर वाले लोग। साथ ही, वे लोग जो प्रतिरक्षा प्रणाली को कम करने वाली दवाएँ लेते हैं (जैसे कि जो कैंसर या स्व-प्रतिरक्षी रोगों आदि के लिए इम्यूनोसप्रेसेन्ट लेते हैं)।
सेप्सिस के चरण क्या हैं?
चिकित्सकीय रूप से, सेप्सिस के तीन चरण होते हैं:
- सेप्सिस: जैसा कि पहले चर्चा की गई है, यह वायरल, बैक्टीरियल या फंगल संक्रमण के प्रति एक अत्यंत नुकसान पहुंचाने वाली प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया है, जिसके कारण साँस लेना, हृदय गति तेज़ हो जाना और बुखार हो सकता है।
- गंभीर सेप्सिस: यह सेप्सिस बढ़ने पर वह चरण है जहाँ रक्तचाप कम हो जाने के कारण या सूजन के कारण अंगों में क्षति शुरू हो जाती है।
- सेप्टिक शॉक: सेप्टिक शॉक सेप्सिस का सबसे गंभीर चरण है। इसमें रक्तचाप बहुत गिर जाता है और यह सामान्य अंतःशिरा द्रव उपचार से नहीं सुधार पाता है। अत्यंत निम्न रक्तचाप के कारण, रक्त महत्वपूर्ण अंगों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुँचा पाता है, जिससे कई अंग विफल होने लगते हैं (फेफड़े, गुर्दे और यकृत सहित) और यह स्थिति जानलेवा हो सकती है।
सेप्सिस के शुरुआती चेतावनी संकेत और लक्षण क्या हैं?
सामान्य संकेत और लक्षणों में शामिल हैं:
- बुखार होना या शरीर का तापमान गिरना और कंपकंपी होना
- भ्रम
- सांस लेने में कठिनाई/ तेज़ या उथली साँसें
- ठंडी, चिपचिपी और पसीने से तर त्वचा
- तेज़ हृदय गति, कमज़ोर नाड़ी या निम्न रक्तचाप
- कम मूत्र उत्पादन
- शरीर में तेज़ दर्द
बच्चों में लक्षण निम्नलिखित हैं:
- तेज़ साँसें
- कंवल्शन (अनियंत्रित जोर से हिलना, ऐंठन)
- त्वचा का पीला पड़ना
- सुस्ती, रुचि का अभाव
- अत्याधिक उनींदा होना
- छूने पर त्वचा ठंडी लगना
सेप्सिस बढ़ कर सेप्टिक शॉक के चरण तक पहुँच सकता है। सेप्टिक शॉक में रक्तचाप में भारी गिरावट होती है। सेप्टिक शॉक की अवस्था पर पहुँचने से मृत्यु का खतरा बहुत बढ़ जाता है। सेप्टिक शॉक के लक्षणों में शामिल हैं:
- खड़े न हो पाना/ चेतना के स्तर में परिवर्तन और इंद्रियों का सुन्न होना
- अत्यधिक उनींदापन
- व्यक्ति का अत्यधिक भ्रमित दिखाई देना
सेप्सिस का निदान कैसे किया जाता है?
सेप्सिस के निदान के लिए कोई सख्त मानदंड नहीं हैं। डॉक्टर आमतौर पर उथली साँस, कमज़ोर नाड़ी, निम्न रक्तचाप और/या बुखार जैसे लक्षणों के आधार पर उपचार शुरू करते हैं।
आमतौर पर किए जाने वाले टेस्ट में शामिल हैं – रक्त परीक्षण (जैसे कि पूर्ण रक्त गणना, रक्त कल्चर, गुर्दे और यकृत कार्य परीक्षण, लैक्टेट आदि) और मूत्र परीक्षण।
अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और एमआरआई जैसे स्कैन भी किए जा सकते हैं।
अनुक्रमिक अंग विफलता आकलन (सिक्वेन्शल ऑर्गन फेलीयर असेस्मन्ट, एसओएफए - SOFA) स्कोर का उपयोग अंगों की कार्यक्षमता में गिरावट का आकलन करने के लिए किया जाता है, जो सेप्सिस की एक प्रमुख विशेषता है। आईसीयू में भर्ती संदिग्ध संक्रमण वाले लोगों के लिए एसओएफए स्कोर, एसआईआरएस मानदंड और क्यूएसओएफए स्कोर के आधार पर किए गए मृत्यु दर का पूर्वानुमान अस्पताल में अन्य भर्ती मरीज़ों के लिए (बिना इन स्कोर के) किए गए पूर्वानुमान से बेहतर पाया गया है।
संदिग्ध संक्रमण वाले लोगों के लिए (जो आईसीयू) में नहीं हैं, त्वरित-एसओएफए (क्यूएसओएफए) स्कोर, एसओएफए स्कोर के आधार पर किए गए मृत्यु दर का पूर्वानुमान अस्पताल में भर्ती अन्य मरीज़ों की मृत्यु दर का पूर्वानुमान की तुलना में बेहतर पाया गया है।
यानि कि, इन स्कोर के इस्तेमाल से मृत्यु दर का पूर्वानुमान बेहतर हो सकता है, और इस से टेस्ट और उपचार संबंधी प्राथमिकता देने में भी आसानी होती है।
निम्नलिखित मानदंडों में से दो या अधिक मानदंड वाले लोगों के लिए अग्रिम नैदानिक जाँच करवानी चाहिए:
- शरीर का तापमान \> 38° सेल्सियस (100.4° फ़ारेनहाइट) या \< 36° सेल्सियस (96.8° फ़ारेनहाइट)
- हृदय गति \> 90 धड़कन प्रति मिनट
- श्वसन दर \> 20 साँस प्रति मिनट या धमनी कार्बन डाइऑक्साइड (पीएसीओ2) का आंशिक दबाव \< 32 मिमी एचजी
- श्वेत रक्त कोशिका (डबल्यूबीसी) की संख्या \> 12,000/एमसीअल (12 × 109/लीटर), \< 4,000/ एमसीअल (4 × 109/लीटर), या \> 10% कोशिकाएं अपरिपक्व (बैंड) के रूप में हैं
निम्नलिखित क्यूएसओएफए मानदंडों में से ≥ 2 वाले लोगों के लिए अग्रिम नैदानिक और प्रयोगशाला जाँच करवानी चाहिए:
- श्वसन दर ≥ 22 साँस प्रति मिनट
- परिवर्तित मानसिक स्थिति
- सिस्टोलिक रक्तचाप ≤ 100 एमएम एचजी
यह एक ऐसा उपकरण है जिसका उपयोग डॉक्टर सेप्सिस से अधिक जोखिम और खराब पूर्वानुमान वाले लोगों की पहचान करने में भी करते हैं। यह तीन मानदंडों का उपयोग करता है: श्वसन दर, परिवर्तित मानसिक स्थिति (ग्लासगो कोमा स्केल), और सिस्टोलिक रक्तचाप।
सेप्सिस का इलाज कैसे किया जाता है?
सेप्सिस का इलाज जल्द-से-जल्द शुरू करने पर सबसे ज़्यादा असरदार होता है। आमतौर पर, डॉक्टर ज़रूरी अंगों में रक्त प्रवाह बनाए रखने के लिए रक्तचाप बढ़ाते हैं। सेप्सिस के इलाज में ये शामिल हो सकते हैं:
- अगर बैक्टीरिया का संक्रमण हो, तो डॉक्टर कुछ एंटीबायोटिक्स दे सकते हैं।
- अकसर व्यक्ति के अंगों में रक्त प्रवाह बनाए रखने और उनके रक्तचाप को ज्यादा गिरने से रोकने के लिए अंतःशिरा (इंट्रावेनस, आईवी) तरल पदार्थ दिए जाते हैं।
- आमतौर पर रक्तचाप बढ़ाने वाली दवाएँ (वैसोप्रेसर दवाएँ) दी जाती हैं।
- कुछ अन्य उपचार: किसी अंग के विफल होने की स्थिति में, उस अंग को सहारा देने के लिए इलाज शुरू किया जाता है, जैसे कि किडनी खराब होने पर डायलिसिस या श्वसन विफलता पर मैकेनिकल वेंटिलेशन।
- कभी-कभी किसी क्षतिग्रस्त ऊतक को निकालने के लिए सर्जरी की भी ज़रूरत पड़ती है।
सेप्सिस का संभावित परिणाम/ भविष्य का पूर्वानुमान क्या है?
सेप्टिक शॉक का परिणाम कई कारकों पर निर्भर करता है, जिनमें शामिल हैं:
- उम्र - वृद्ध वयस्क, नवजात शिशु और कम उम्र के शिशु में खराब परिणाम की संभावना अधिक है
- व्यक्ति की समग्र स्वास्थ्य स्थिति
- अगर व्यक्ति को अन्य ऐसी क्रानिक बीमारियाँ हैं जिन से खराब परिणाम की संभावना अधिक होती है
- यदि व्यक्ति को वेंटिलेटर सपोर्ट की आवश्यकता है, तो यह भी परिणाम को प्रभावित कर सकता है
- खराब किडनी फ़ंक्शन वाले लोगों में परिणाम खराब हो सकता है
- संक्रमण पैदा करने वाले रोगाणु/जीव का प्रकार
- सेप्टिक शॉक से प्रभावित अंगों की संख्या
- एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति व्यक्ति की संवेदनशीलता
सेप्सिस के परिणाम का पूर्वानुमान उपरोक्त कारकों पर, और निदान व उपचार कितनी जल्दी शुरू हुआ था, इस पर निर्भर करता है। हल्के सेप्सिस वाले अधिकांश लोगों को यदि चिकित्सा सहायता शीघ्र मिले तो वे पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। गंभीर सेप्सिस और सेप्टिक शॉक की स्थिति में मृत्यु की संभावना अधिक होती है, लगभग 30-40% सेप्टिक शॉक वाले लोग उपचार के बावजूद मर सकते हैं। चिंता का एक और गंभीर कारण दीर्घकालिक उत्तरजीविता है। सेप्सिस से बचे 50% से अधिक लोगों की पाँच वर्षों के भीतर मृत्यु होती है, जो अधिकतर जटिलताओं या अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्याओं के कारण होती है।
क्या आप सेप्सिस से बच सकते हैं?
सेप्सिस के सभी मामलों से बचा नहीं जा सकता, लेकिन आप निम्नलिखित तरीकों से जोखिम को कम कर सकते हैं:
- टीके समय पर लगवाते रहें (जैसे हर साल फ्लू का टीका और निमोनिया के लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार न्यूमोकोकल टीका)
- अच्छी स्वच्छता बनाए रखें और हाथ धोते रहें
- किसी भी संक्रमण का निदान और उपचार जितनी जल्दी हो सके, उतना करें
- अस्पतालों में उचित संक्रमण नियंत्रण प्रणाली सुनिश्चित करें
सेप्सिस के बाद रिकवरी कैसी होती है?
सेप्सिस के बाद, पूरी तरह से ठीक होने में हफ़्तों या महीनों का समय लग सकता है। कुछ लोगों में पोस्ट-सेप्सिस सिंड्रोम नजर आता है, जिसमें थकान, याददाश्त या संज्ञानात्मक समस्याएँ, मांसपेशियों या जोड़ों में दर्द और कमज़ोरी जैसे लक्षण शामिल हैं। पुनर्वास, अच्छा पोषण, काउनसेलिंग और नियमित फॉलो-अप चिकित्सकीय देखभाल रिकवरी को बेहतर बना सकती है।
सेप्सिस या सेप्टिक शॉक से बचे कई लोग ठीक लग सकते हैं, लेकिन उनमें अभी भी अवसाद या चिंता जैसी कुछ समस्याएँ हो सकती हैं। कुछ मामलों में, उन्हें पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी) का निदान मिल सकता है। पीटीएसडी पोस्ट-सेप्सिस सिंड्रोम (पीएसएस) के एक भाग के रूप में हो सकता है और यह उन लोगों के लिए असामान्य नहीं है जिनका इलाज आईसीयू में किया गया था, खासकर अगर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। पोस्ट-सेप्सिस सिंड्रोम के बारे में अभी भी चिकित्सा समुदाय में ज्यादा जागरूकता नहीं है।
सेप्सिस के बारे में कई अज्ञात तथ्यों में से एक यह है कि यह अभी तक पता नहीं है कि कि कुछ लोग पूरी तरह से ठीक क्यों हो जाते हैं और कुछ पूरी तरह क्यों नहीं ठीक हो पाते। दर्द प्रबंधन में विशेषज्ञता रखने वाले डॉक्टर (जैसे कि किसी दर्द प्रबंधन क्लिनिक में) को ढूंढना और दर्द, थकान और संज्ञानात्मक समस्याओं से जूझने के तरीके सीखने के लिए किसी चिकित्सक/ काउनसेलर से मिलना बेहद मददगार होता है।
कौन से ऐसे संकेत हैं जो गंभीरता से लेने चाहिए और जिन में तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए?
अगर किसी संक्रमित व्यक्ति में अचानक बुखार, भ्रम, सांस लेने में तकलीफ, तेज़ दिल की धड़कन या बेहद कम रक्तचाप विकसित हो, तो उसे तुरंत डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए। तुरंत हस्तक्षेप करने से बहुत फर्क पड़ता है और परिणाम बेहतर होने की संभावना है।
क्या आपको फिर से सेप्सिस हो सकता है (क्या सेप्सिस दोबारा होने की संभावना है)?
सेप्सिस से पहले ठीक हो चुके लोगों में से 40% से ज़्यादा, और एक-तिहाई सेप्सिस से सभी ठीक हुए लोग सेप्सिस के पहले निदान के तीन महीने के भीतर फिर से अस्पताल में भर्ती हो जाते हैं। यह आमतौर पर सेप्सिस के दोबारा होने या किसी नए संक्रमण के कारण होता है।
सेप्सिस को दोबारा होने को कैसे रोकें?
सेप्सिस दुबारा होने से बचने के लिए, किसी भी नए संक्रमण का तुरंत इलाज करना, और डॉक्टर द्वारा दी गई चिकित्सीय सलाह का पालन करना ज़रूरी है। किसी भी संबंधित या सहवर्ती चिकित्सीय स्थिति का अच्छी तरह से प्रबंधन किया जाना चाहिए। वयस्कों को सभी टीके समय पर लगवाने चाहिए, किसी भी घाव का उचित उपचार किया जाना चाहिए, अच्छी स्वच्छता बनाए रखी जानी चाहिए, और संक्रमण के लिए समय पर डॉक्टर से इलाज करवाना चाहिए, जिसमें सलाह के अनुसार एंटीबायोटिक का उपयोग शामिल हो सकता है।
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