Skip to main content
Submitted by PatientsEngage on 27 March 2026
A young woman with Interstitial lung disease in a white top and red skirt using portable oxygen and text overlay Living with Fibrosing ILD

मानसी सिर्फ 19 साल की थीं जब उन्हें 'फाइब्रोसिंग इंटरस्टीशियल लंग डिजीज (आईएलडी )' का निदान मिला- यह फेफड़ों की एक गंभीर बीमारी है। मानसी को डर था कि यह बीमारी उनके जीवन को, उनकी उम्मीदों और सपनों को सीमित कर देगी, लेकिन समय के साथ, उन्होंने इस से जूझना सीखा और अपनी ज़िंदगी जीने के लिए अपना रास्ता बनाया। इस लेख में वे 'फाइब्रोसिंग आईएलडी' से जूझने के सफर को साझा कर रही हैं।

कृपया हमें अपनी स्थिति के बारे में कुछ बताएं।

मुझे 'फाइब्रोसिंग आईएलडी' (इंटरस्टीशियल लंग डिजीज) है। इसमें फेफड़ों के ऊतक (tissues) सख्त हो जाते हैं और उन पर निशान (scarring) पड़ जाते हैं, जिससे फेफड़े सिकुड़ जाते हैं और शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। मरीज़ को लगातार खांसी रहती है, सांस लेने में तकलीफ होती है और बहुत ज्यादा थकान महसूस होती है।

आपको इस बीमारी का निदान कब मिला?

जब मैं 18 साल की थी, तब मेरे सीटी स्कैन में कुछ गड़बड़ियां पाई गई थीं, पर बीमारी का निदान मुझे 19 साल की उम्र में मिला ।

शुरुआती लक्षण क्या थे? आप डॉक्टर के पास क्यों गईं?

मुझे बार-बार खांसी हो रही थी, और वह सामान्य दवाइयों और घरेलू नुस्खों से ठीक नहीं हो रही थी। यह सिलसिला 3-4 महीने तक चलता रहा। जब खाँसते समय थोड़ा खून निकाला तो मैं अपने शहर के एक स्पेशलिस्ट डॉक्टर के पास गई, जिन्होंने कहा कि मुझे टीबी है – पर यह निदान गलत था। हम उस डॉक्टर की जांच से संतुष्ट नहीं थे, इसलिए हमने मुंबई में एक 'पल्मोनोलॉजिस्ट' (फेफड़ों के विशेषज्ञ) से संपर्क किया।

सबसे पहले, हमने डॉक्टर के साथ ऑनलाइन कंसल्टेशन किया, और उन्होंने हमें सब रिपोर्ट्स लेकर मुंबई आने के लिए कहा। डॉक्टर चुनते समय हमने मुंबई में विशेषज्ञ इसलिए चुना क्योंकि मुंबई मेरे शहर के सबसे पास का बड़ा शहर (मेट्रो सिटी) है, और हमारे रिश्तेदारों का उस डॉक्टर के साथ अनुभव काफी अच्छा रहा था।

कौन-कौन से टेस्ट किए गए? निदान कैसे किया गया?

एक्स-रे, हाई-रिज़ॉल्यूशन सीटी स्कैन (एचआरसीटी), पीएफटी (पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट, फेफड़ों की कार्यक्षमता का टेस्ट), और खून के कुछ टेस्ट किए गए। मुंबई वाले डॉक्टर को पूरा यकीन था कि मेरी लगातार हो रही खांसी का कारण टीबी नहीं, बल्कि कुछ और था। टेस्ट से इस बात की पुष्टि हो गई कि मुझे आईएलडी है

बीमारी का पता चलने पर आपकी क्या प्रतिक्रिया थी? आपने अपने परिवार को इस बारे में कब और कैसे बताया?

शुरू में कुछ समय के लिए तो हम खुश थे कि यह टीबी (ट्यूबरकुलोसिस, क्षय रोग) नहीं है, क्योंकि उस समय हमें आईएलडी के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। बाद में, जब हमें एहसास हुआ कि इस बीमारी का तो कोई इलाज नहीं है, और यह मेरे जीवनकाल को सीमित कर सकती है, तो इस स्थिति को स्वीकार करना कुछ मुश्किल था।

मेरे परिवार ने मेरा बहुत साथ दिया है, लेकिन कई बार उनके लिए भी यह सब संभालना बहुत मुश्किल हो जाता है।

निदान के बाद क्या हुआ?

मेरे इलाज करने वाले पल्मोनोलॉजिस्ट ने पहले मुझे स्टेरॉयड दिए, फिर मुझे एंटी-फाइब्रोटिक दवाएँ दी गईं, जिनसे मुझे पेट की समस्याएँ होने लगीं। अब मैं स्टेरॉयड, एंटी-फाइब्रोटिक दवाएँ और इम्यूनोसप्रेसेंट्स (प्रतिरक्षा प्रणाली को दबाने की दवा) ले रही हूँ।

क्या आपने किसी अन्य प्रणाली की दवा या थेरेपी – जैसे होम्योपैथी या आयुर्वेद - आज़माई है? अगर हाँ, तो क्या उनसे फ़ायदा हुआ?

मैंने एक आयुर्वेदिक डॉक्टर से सलाह ली थी। उससे कोई फ़ायदा नहीं हुआ, उल्टा मेरी हालत और बिगड़ गई।

वर्तमान में आप कौन-सी दवाएँ ले रही हैं?

एंटी-फाइब्रोटिक दवा, स्टेरॉयड, माइकोफेनोलेट मोफेटिल (एक इम्यूनोसप्रेसेंट दवा), कैल्शियम सप्लीमेंट, गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफलक्स डिजीज और अल्सर के जोखिम के लिए अल्सर-रोधी दवा, और फेफड़ों में सूजन कम करने के लिए एक मोनोक्लोनल एंटीबॉडी।

क्या इन दवाओं के कोई साइड-इफ़ेक्ट हुए? अगर हाँ, तो आप इन दुष्प्रभावों को कैसे संभालती हैं?

एंटी-फाइब्रोटिक दवाओं से पेट की समस्याएँ होती हैं। मैं कुछ खास तरह के खाने से परहेज़ करके, और स्वस्थ, कम मसालेदार, कम तेल वाला और साफ़-सुथरा खाना खाकर लक्षणों को संभालने की कोशिश कर रही हूँ। मेरे डॉक्टर ने खाने संबंधी या अन्य किसी परहेज के बारे में कोई सुझाव नहीं दिया था।

स्वस्थ और पौष्टिक खाने का मतलब है ऐसा भोजन जिसमें पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन हो, और जो साफ़-सुथरे तरीके से पकाया गया हो। ऐसे भोजन में जंक फ़ूड बिल्कुल भी नहीं होता है, या बहुत ही कम होता है।

आप किस-किस तरह के विशेषज्ञों (जैसे फ़िज़ियो/ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट/मनोचिकित्सक वगैरह) से सलाह लेती हैं और कितनी बार?

मैं पल्मोनोलॉजिस्ट से साल में दो बार सलाह लेती हूँ। पल्मोनरी फ़िज़ियोथेरेपिस्ट से रोज ऑनलाइन एक घंटे रीहैब (पुनर्वास) के लिए मिलती हूँ। इस सत्र में साँस लेने के व्यायाम, ताकत बढ़ाने वाले व्यायाम और एरोबिक व्यायाम शामिल हैं।

क्या आपके परिवार में किसी को यह बीमारी हुई है?

नहीं।

इस बीमारी की वजह से आपने अपनी जीवनशैली में क्या बदलाव किए हैं?

मुझे अपनी जीवन की रफ़्तार धीमी करनी पड़ी और साफ़-सफ़ाई को लेकर बहुत ज़्यादा सावधान रहना पड़ता है। मैं बाहर का अधिकांश खाना नहीं खा सकती – इस के लिए प्रबंधन करना खास चुनौती पेश करता है क्योंकि मैं हॉस्टल में रहती हूँ। चलते समय मुझे पोर्टेबल ऑक्सीजन पर निर्भर रहना पड़ता है। कॉलेज के जिस सेमेस्टर में मुझे ऑक्सीजन की ज़रूरत पड़ने लगी, मेरे परिवार वाले मेरे हॉस्टल में रहने को लेकर बहुत चिंतित थे। वे मुझे घर ले आए। बाद मैं, जब 2 हफ़्ते के लिए मैं कैंपस वापस गयी, मैं वहाँ ठीक से रह नहीं पाई और मुझे घर लौटना पड़ा। सेमेस्टर के अंत में परीक्षा दे पाऊँ इस के लिए भी मुझे प्रशासनिक दिक्कतों का सामना करते रहना पड़ा। पर शुक्र है, आखिर में जरूरी प्रबंध हो पाया।

दोस्तियों के मामले में, अब मुझे एहसास हो गया है कि वास्तव में कौन-कौन मेरे साथ खड़े रहेंगे। मेरी काफ़ी दोस्तियाँ टूट गई हैं; कुछ लोगों ने अपनी कुछ वजहों से मुझसे दूरी बनाना शुरू कर दिया है।

हॉस्टल में सेहतमंद खाना मिल पाना मुश्किल होता है। इसलिए मैंने खाना बनाने का इंतज़ाम कर लिया है, और अब मैं हॉस्टल में अपना खाना खुद बनाती हूँ। मैं यह सुनिश्चित करती हूँ कि मुझे पर्याप्त प्रोटीन और अंडे मिलें, और मैं अपने पास सेहतमंद स्नैक्स और फल रखती हूँ।

आपने मानसिक/ भावनात्मक रूप से इस सब का सामना कैसे किया? कृपया उन खास बातों और दिक्कतों के बारे में बताएँ जो ज्यादा मुश्किल थे।

मैं खुद को व्यस्त रखती हूँ ताकि मुझे चिंता करने का समय न मिले। मैं उन चीज़ों में व्यस्त रहती हूँ जो मुझे पसंद हैं। वर्तमान में, चलते समय मुझे ऑक्सीजन का इस्तेमाल करना पड़ता है। खाँसी आती-जाती रहती है और बार-बार होती है। दवाओं की वजह से पाचन से जुड़ी कुछ दिक्कतें भी होती हैं। कभी-कभी थोड़ा बुखार और थकान भी होता है। बाकी सब ठीक है।

जब मुझे ऑक्सीजन थेरेपी की जरूरत होने लगी थी, तो मेरी नाक में लगी पाइप, नेज़ल कैनुला, लोगों का ध्यान आकर्षित करती थी और मुझे उनके ऐसे देखने से परेशानी होती थी। साथ ही, मुझे एक के बाद एक बहुत सी गोलियाँ लेनी होती हैं। लगता है कि यह स्थिति कभी ठीक नहीं होगी। इस सब का भावनात्मक बोझ बहुत अधिक है। इसको स्वीकारके अपनी जिंदगी जीना मुश्किल लगता है, लेकिन हम जैसे इस रोग के मरीज़ों के लिए इसके अलावा कोई चारा भी तो नहीं।

क्या आपने मदद के लिए किसी काउंसलर से संपर्क किया? क्या आपके डॉक्टर ने आपको काउंसलिंग करवाने का सुझाव दिया था?

हाँ, मैंने खुद ही एक काउंसलर से संपर्क किया, हालांकि मेरे डॉक्टर ने इसका सुझाव नहीं दिया था। रिश्ते, दोस्ती, पढ़ाई, करियर और परिवार से जुड़ी चीज़ें सब मिल कर भावनात्मक रूप से मुझ पर बहुत ज़्यादा हावी होती जा रही थीं। मैं ऑनलाइन काउंसलिंग ले रही हूँ और यह मेरे लिए काफी मददगार रही है।

आपके परिवार ने इस दौरान आपका साथ कैसे दिया? इस पूरे सफ़र में आपका सबसे बड़ा सहारा/ साथी कौन रहा है?

मेरे परिवार ने सचमुच मेरा बहुत साथ दिया है—चाहे मेरी भावनात्मक सेहत की बात हो, या फिर वे उन गतिविधियों के लिए जो मुझे अच्छी लगती हैं। उन्होंने मुझे घर से दूर भेजने के जोखिमों के बावजूद मेरी पढ़ाई में मुझे सहारा दिया है। मैं इस को लेकर खास तौर से धन्य हूँ कि मेरे भाई ने शुरू से ही मेरा साथ दिया है; वह जितना कर सकता है वह सब मेरे लिए करता है। वह वास्तव में स्तम्भ की तरह मेरे साथ खड़ा रहा है।

आपने अपने दोस्तों और दूर के रिश्तेदारों को अपनी बीमारी के बारे में कब बताया? उनकी क्या प्रतिक्रिया थी?

मुझे लोगों को अपनी बीमारी के बारे में तब बताना पड़ा जब मुझे पोर्टेबल ऑक्सीजन का इस्तेमाल करने की जरूरत होने लगी। शुरू में तो लगा कि लोग सहारा दे रहे हैं, पर समय के साथ सबके लिए मेरी स्थिति बस एक आम-सी बात बन गई है। कभी-कभी दूर के रिश्तेदारों से मिलने वाली बिन-माँगी और बेतुकी सलाह मुझे बहुत परेशान करती है। कई बार समझाने के बावजूद लोग यह समझते ही नहीं कि इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है, बस ज्यादा से ज्यादा इसे दवाओं और थेरपी से नियंत्रित किया जा सकता है।

क्या आपने अपने कॉलेज को अपनी बीमारी के बारे में बताया था? अगर हाँ, तो उन्होंने इस स्थिति को कैसे संभाला?

जब मैंने ऑक्सीजन का इस्तेमाल करना शुरू किया, तो मुझे अपने कॉलेज को अपनी बीमारी के बारे में बताना पड़ा। शुरू में कई तरह की प्रशासनिक दिक्कतें आईं, लेकिन अब मुझे आवश्यक सहायता मिल पाए, इस के लिए कॉलेज और मेरे बीच, दोनों को मान्य व्यावहारिक हल मिल पाया है।

अपनी कुछ चुनौतियों के बारे में बताएं।

ज़्यादातर दिक्कतें इस बात से जुड़ी थीं कि उस समय कॉलेज का प्रशासन मेरी मेडिकल ज़रूरतों के हिसाब से सहायता दे पाने में असमर्थ था। मुझे 'रिमोट लर्निंग' (घर बैठे ऑनलाइन पढ़ाई) की सुविधा पाने के लिए काफ़ी संघर्ष करना पड़ा, लेकिन मुझे लगता है कि अब मुझे इसका कारगर हल मिल गया है।

आईएलडी के कारण आपको किस चीज कमी सबसे अधिक खलती है?

मुझे अपने भविष्य को लेकर निश्चित न होना बहुत खलता है। मुझे उन दिनों की बहुत याद आती है जब रोज़मर्रा के आम काम करने के लिए मुझे पोर्टेबल ऑक्सीजन कंसंट्रेटर से बंधा नहीं रहना पड़ता था। मुझे उन दिनों की याद आती है जब मैं अपने दोस्तों की तरह खाने-पीने, घूमने-फिरने और अलग-अलग गतिविधियों में हिस्सा लेने को लेकर बिल्कुल बेफिक्र रहती थी। मुझे उन दिनों की याद आती है जब मुझे दवाएँ नहीं लेनी पड़ती थीं, और मुझे इस बात का कोई अंदाज़ा नहीं था कि बीमार पड़ना कितना महँगा हो सकता है। और मुझे सच में उन दिनों की बहुत याद आती है जब मैं पूरे समय थकी हुई और कमज़ोर नहीं महसूस करती थी।

जो लोग इसी तरह की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, उनके लिए आपकी क्या सलाह है?

आगे बढ़ते रहें। फेफड़ों के पुनर्वास के लिये निर्धारित व्यायाम करें। यह सुनिश्चित करें कि आप अच्छी मात्रा में प्रोटीन ले रहे हैं। खुद को हमेशा सकारात्मक रखने की कोशिश करें। उम्मीद बरकरार रखें। उन चीज़ों में व्यस्त रहें जिन्हें करना आपको बहुत पसंद है। फेफड़ों की क्षमता सीमित होने के बावजूद भी, हम खुशी से जीना चुन सकते हैं।

आप भविष्य को लेकर किस बात से चिंतित हैं?

अपनी बीमारी के साथ-साथ अपने करियर और पढ़ाई-लिखाई को संभालना कभी-कभी चिंता का विषय बन जाता है, लेकिन मुझे लगता है कि मैं इसका कोई न कोई हल ज़रूर ढूँढ़ निकालूँगी।

एक और बात जो मुझे परेशान करती है, वह है कि अगर कभी ट्रांसप्लांट (अंग-प्रत्यारोपण) करवाने की ज़रूरत पड़ी, तो मुझे और मेरे परिवार को बहुत भारी भावनात्मक और आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ेगा।

Changed
06/Apr/2026