Skip to main content
Submitted by PatientsEngage on 30 June 2026
Stock pic of a young woman fainting and the text overlay When to take fainting seriously

बेहोशी एक ऐसी घटना है जिससे हम सभी परिचित हैं। यह लक्षण आमतौर पर किसी मेडिकल समस्या के कारण होता है। इस लेख में पेशेंटसएन्गेज की टीम आपको बेहोशी के कई कारणों को समझने में मदद करती है और यह भी बताती है कि डॉक्टर से कब मिलना चाहिए।

बेहोशी एक स्विच के बंद होने जैसा है। इसे हम मूर्छा और चेतना खोने के नाम से भी जानते हैं। बेहोशी तब होती है जब दिमाग को कुछ समय के लिए ज़रूरत से कम खून मिलता है, और इस के कारण कुछ समय के लिए व्यक्ति अपने आस-पास की चीज़ों के प्रति अनजान हो जाते हैं।

Read in English: When to take Fainting Seriously

हममें से ज़्यादातर लोगों ने अपने स्कूल के दिनों में किसी को लंबे समय तक खड़े रहने के कारण बेहोश होते देखा होगा। यह ऐसी स्थिति का एक उदाहरण है जिस में दिमाग में खून के बहाव में अचानक कमी होती है, जिस के कारण चेतना अस्थायी रूप से खो जाती है। बेहोशी को समझने से हमें 'अचेतन अवस्था' की स्थिति को बेहतर समझना होगा। थोड़ी देर के लिए होने वाली बेहोशी को मेडिकल भाषा में सिंकोप कहते हैं। पर चेतना खोने की स्थिति छोटी या बड़ी, सब तरह की हो सकती है - छोटे और हानिरहित सिंकोप की घटना से लेकर गंभीर और लंबे समय तक के चलने वाले कोमा तक, जिस में दिमाग का सामान्य कामकाज लंबे समय के लिए बाधित हो जाता है। चेतना खोने की स्थिति आमतौर पर किसी अंदरूनी मेडिकल समस्या का लक्षण होती है, और इस में व्यक्ति अपने आस-पास के प्रति अनजान हो जाते हैं और किसी भी चीज़ पर प्रतिक्रिया न दे पाते हैं।

चेतना खोने के क्या संभव कारण हैं?

बेहोश होने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे सिर में चोट लगने से गिरना, स्ट्रोक, ड्रग्स या शराब का ओवरडोज़, खून में शुगर का स्तर कम होना, शरीर में पानी की कमी (निर्जलीकरण), घबराहट और चिंता का दौरा (ऐंगज़ाइइटी अटैक), और दिल या दिमाग से जुड़ी गंभीर समस्याएँ। आम कारणों में शामिल हैं: 'वैसोवैगल सिंकोप” (इसमें बेहोशी रिफ्लेक्स हाइपोटेंशन के कारण होती है) तब हो सकता है जब कोई इंजेक्शन लगवाता है या किसी चीज़ से डरता है; 'ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन - इस में बैठने या लेटने की स्थिति से अचानक खड़े होने पर ब्लड प्रेशर में गिरावट होती है, जिस से बेहोशी होती हिल; 'कार्डियक अरिथमिया' (अतालता) —यानी दिल की धड़कन की लय में बदलाव के कारण बेहोश होना। बहुत लंबे समय तक धूप में रहना भी एक आम कारण है, जिससे पसीने के ज़रिए शरीर से इलेक्ट्रोलाइट्स निकल जाते हैं और शरीर का तापमान गिर जाता है, जिसके परिणामस्वरूप व्यक्ति बेहोश हो सकता है।

आम भाषा में और मेडिकल भाषा में चेतना खोने जैसे अनुभवों के लिए कई शब्दों का प्रयोग होता है। ऐसे कुछ शब्दों - चेतना खोने, मेडिकल शब्द सिंकोप (जिसे हम हिन्दी में अक्सर बेहोशी कहते हैं)। ब्लैकआउट, सीजर और कोमा - में क्या अंतर है?

सिंकोप: यह मेडिकल भाषा में इस्तेमाल होने वाला एक शब्द है। इस में दिमाग में खून के बहाव में अस्थायी कमी के कारण चेतना कुछ समय के लिए चली जाती है। सिंकोप अचानक शुरू होता है, बहुत कम समय तक रहता है, और आमतौर पर व्यक्ति अपने आप पूरी तरह से ठीक हो जाता है। इसके शुरू होने से पहले अक्सर कुछ लक्षण दिखाई देते हैं, जिन्हें 'प्री-सिंकोपल लक्षण' कहा जाता है। इनमें चक्कर आना, आँखों के आगे धुंधलापन छा जाना (जिसे "टनल विज़न" भी कहते हैं), जी मिचलाना, या पसीना आना शामिल हैं।

बेहोशी: आम भाषा में सिंकोप को अंग्रेजी में फेंटिंग और हिन्दी में बेहोश होना कहते हैं। पर बेहोशी और फेंटिंग का इस्तेमाल सिर्फ इस समस्या (दिमाग में खून की सप्लाई का कुछ समय के लिए कम हो जाना) के लिए नहीं होता, इसलिए समस्या समझाने के लिए ये शब्द इतने सटीक/ उपयोगी नहीं है।

ब्लैकआउट: यह आम भाषा में इस्तेमाल होने वाला एक शब्द है जो मेडिकल भाषा में परिभाषित नहीं है। लोग इसका इस्तेमाल किसी भी ऐसी स्थिति के लिए करते हैं जिस में कोई या तो बेहोश हो जाता है या उनको किसी प्रकार का दौरा पड़ता है या जिस में व्यक्ति की याददाश्त कुछ समय के लिए चली जाती है (उदाहरण: शराब पीने से होने वाले ब्लैकआउट)। यानि कि, जब कोई कहे, "मुझे ब्लैकआउट हुआ था," तो सुनने वालों को इस से समस्या की पूरी समझ नहीं मिलती – समस्या समझने के लिए यह स्पष्ट करना होगा कि क्या व्यक्ति की चेतना चली गई थी, या याददाश्त चली गई थी, या शरीर का संतुलन बिगड़ गया था, आदि। बिना इस तरह के संदर्भ के यह शब्द अस्पष्ट है।

चेतना खोना (लॉस ऑफ कॉनशियसनेस): यह एक विस्तृत मेडिकल शब्द है जिसका मतलब है पूरी तरह से होश खोना और बाहरी उत्तेजना पर कोई प्रतिक्रिया न देना (जैसे कि, टॉर्च चमकाने पर या त्वचा छूने पर कोई प्रतिक्रिया न होना)। इस शब्द के विस्तृत दायरे में अनेक स्थितियाँ आती हैं - सिंकोप, सीजर, सिर में गंभीर चोट, मेटाबॉलिज़्म से जुड़ी गड़बड़ियां, या नशे में धुत्त होकर चेतना खोना। चेतना खोने का एक कारण है खून के बहाव से जुड़ी वजहें (जैसे कि सिंकोप), पर चेतना अन्य कारणों से भी खो सकती है, जैसे कि अपस्मार (एपिलेप्सी) का सीजर, या सिर पर चोट लगना।

सीजर (अपस्मार / एपिलेप्सी के कारण चेतना खोना): इस में चेतना खोने का कारण रक्त प्रवाह की समस्या नहीं, बल्कि न्यूरोलॉजिकल (तंत्रिका संबंधी) है। सीजर दिमाग के कॉर्टेक्स में असामान्य विद्युत गतिविधि के कारण होता है, न कि खून के बहाव में कमी के कारण। इसमें अक्सर शरीर या अंगों का अपने आप हिलना-डुलना, जीभ काटना, पेशाब या मल का अपने आप निकल जाना, सीजर के बाद कुछ समय तक भ्रम की स्थिति रहना, और ठीक होने में ज़्यादा समय लगना शामिल होता है। इस स्थिति में ईईजी (विद्युत मस्तिष्क लेखी, दिमाग की विद्युत आवेग तरंगों के पैटर्न का रिकार्ड) में असामान्य पैटर्न दिखाई देते हैं।

कोमा (निश्चेतनता): यह एक ऐसी लगातार बनी रहने वाली स्थिति है जिसमें व्यक्ति को जगाया नहीं जा सकता और व्यक्ति में कोई प्रतिक्रिया नहीं नजर आती; इसकी अवधि सिंकोप या सीजर जैसी छोटी नहीं होती। यह दिमाग के पिछले हिस्से (ब्रेनस्टेम, मस्तिष्क स्तंभ) या दिमाग के दोनों हिस्सों (सेरीब्रल हेमिस्फ़ीअर, प्रमस्तिष्क गोलार्ध) में गंभीर विकार के कारण होता है।

बेहोशी से जुड़े आम लक्षण:

  • आंखों के आगे अंधेरा छा जाना (ब्लैकिंग आउट)
  • बिना किसी वजह के गिर जाना
  • सिर हल्का लगना या चक्कर आना
  • उनींदा होना या चकराना, और धीमापन महसूस होना
  • खड़े होने पर शरीर में अस्थिरता या कमज़ोरी महसूस होना
  • आंखों के आगे धब्बे दिखना या सिर्फ़ सामने की पास वाली चीजों को ठीक देख पाना (टनल विज़न)
  • सिरदर्द होना
  • पसीना आना या जी मिचलाना

बेहोशी किन वजहों से होती है?

  • लंबे समय तक खड़े रहना
  • नाक खोलने वाली दवाएं (खांसी और ज़ुकाम की दवाएं) या ब्लड प्रेशर की कुछ दवाएं लेना
  • लंबे समय तक गर्मी में बाहर रहना, जिससे पसीना आए और शरीर में पानी की कमी
  • बहुत ज़्यादा खाना या कैफ़ीन लेना, या बहुत ज़्यादा मात्रा में अल्कोहॉल वाले पेय (शराब, वाइन, व्हिस्की आदि) पीना
  • शरीर में नमक और पानी की बहुत ज़्यादा कमी होना
  • शरीर की स्थिति (आसन) बदलना, खासकर अचानक से खड़े हो जाना
  • दिल से जुड़ी कोई ऐसी समस्या होना जो खून के बहाव पर असर डालती हो
  • दिमाग, तंत्रिकाओं (नर्व) या रीढ़ की हड्डी में कोई समस्या होना
  • लंबे समय तक गर्मी में रहने से पसीना आना और डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) हो सकती है।
  • खून में ग्लूकोज़ का स्तर कम होना
  • दवाओं के कारण या नमक का सेवन कम करने से ब्लड प्रेशर कम होना
  • बहुत ज़्यादा उल्टी, दस्त या कुछ दवाओं (जैसे डाइयूरेटिक्स/ मूत्र वर्धक) के कारण शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ जाना

जब कोई व्यक्ति बेहोश हो तो क्या करें?

व्यक्ति को पीठ के बल लिटा दें। अगर कोई चोट नहीं लगी है और व्यक्ति सांस ले रहे हैं, तो उनके पैरों को ऊपर उठा दें। व्यक्ति के पैरों को, अगर हो सके तो, दिल के लेवल से लगभग 12 इंच ऊपर उठाएँ। कोई भी बेल्ट, कॉलर, या अन्य कसे हुए कपड़े ढीले कर दें।

अगर बहुत ज़्यादा पसीना आने, दस्त या उल्टी की वजह से इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो गई है, तो सोडियम की कमी से होने वाले कम ब्लड प्रेशर को ठीक करने में मदद के लिए पुनर्जलीकरण के लिए विशेष घोल, ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ओआरएस) दिया जा सकता है।

दोबारा बेहोश होने का खतरा कम करने के लिए, व्यक्ति को धीरे-धीरे उठने दें। अगर व्यक्ति एक मिनट के अंदर होश में नहीं आए, तो इमरजेंसी डिपार्टमेंट में ले जाएँ।

देखें व्यक्ति सांस ले रहे हैं या नहीं। देखें कि नब्ज़ चल रही है या नहीं। यदि व्यक्ति साँस नहीं ले रहे हैं तो कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) देना शुरू करें। यह प्राथमिक चिकित्सा (फर्स्ट ऐड) के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण जीवन रक्षक तकनीक है।

प्राथमिक चिकित्सा (फर्स्ट-एड_ कैसे करें, यह जानने के लिए यहाँ क्लिक करें: https://www.patientsengage.com/conditions/first-aid-cardiac-arrest

किन स्थितियों में बेहोश होने पर डॉक्टर से मिलना उचित है?

बेहोशी आमतौर पर गंभीर समस्या नहीं होती और इसकी देखभाल घर पर ही की जा सकती है। ऐसा उन स्थितियों में ठीक है यदि व्यक्ति लंबे समय तक खड़े रहने, पानी की कमी (निर्जलीकरण), दर्द, मानसिक तनाव या गर्मी के संपर्क में आने की वजह से सिर्फ़ एक बार बेहोश हुए हैं और जल्दी (कुछ ही सेकंड में) ठीक हो गए हैं। साथ ही उन्हें बेहोश होने से पहले चक्कर आना, पसीना आना या आँखों के आगे अँधेरा छाने जैसे आम लक्षण भी महसूस हुए थे। लेकिन ऐसे मामूली मामलों में भी, आपको अपने डॉक्टर को इसके बारे में ज़रूर बताना चाहिए। हो सकता है कि व्यक्ति को कोई अनजान हृदय की समस्या हो, इसलिए डॉक्टर से जाँच करवा लेनी चाहिए, खासकर उन किशोरों या युवाओं के लिए जो खेल-कूद में हिस्सा लेते हैं।

तुरंत अस्पताल कब जाना चाहिए?

अगर आपको नीचे दिए गए लक्षण दिखाई दें, तो व्यक्ति को तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए:

अगर आपको नीचे दिए गए लक्षण दिखाई दें, तो व्यक्ति को तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए:

  • शारीरिक परिश्रम करने पर/ ज्यादा जोर लगाने पर हुई बेहोशी (एग्जरशनल सिंकोप): व्यायाम करते समय या उसके तुरंत बाद बेहोश हो जाना (यह दिल से खून के बहाव में रुकावट या दिल की धड़कन में अतालता – अरिथमिया - का संकेत हो सकता है)।
  • होश खोने से पहले दिल की धड़कन तेज़ होना या सीने में दर्द होना: यह दिल की धड़कन में अतालता या दिल की मांसपेशियों में खून की कमी (माएओकार्डियल इसकीमिया, हृदपेशी स्थानिक अरक्तता ) का संकेत हो सकता है।
  • साँस लेने में तकलीफ़ या त्वचा का नीला पड़ना (साइनोसिस): यह दिल या फेफड़ों से जुड़ी किसी समस्या का संकेत हो सकता है।

बेहोशी की घटना के बाद:

  • लंबे समय तक भ्रम या उनींदापन रहना: यह सीजर का संकेत हो सकता है, न कि सिर्फ़ साधारण बेहोशी का।
  • गिरने की वजह से गंभीर चोटें लगना (खासकर सिर पर चोट) और खून बहना।
  • जीभ का काटना, मल-मूत्र पर से नियंत्रण खो देना, या नजर आना कि व्यक्ति को मिर्गी का दौरा जैसे पड़ा है: ये एपिलेप्सी (अपस्मार) के सीजर के संकेत हो सकते हैं।
  • कुछ ही मिनटों के अंदर वापस होश में न आना।
  • अगर बेहोशी के साथ-साथ बोलने में लड़खड़ाहट हो, या हाथ-पैरों में कमज़ोरी जैसे कोई और लक्षण भी दिखाई दें, तो यह दिमाग से जुड़ी किसी समस्या (न्यूरोलाजिकल कारण) का संकेत हो सकता है।

मेडिकल इतिहास या बेहोशी संबंधी जोखिम कारक मौजूद होना:

  • व्यक्ति को दिल की बीमारी या अतालता हो, या इनका या अचानक कार्डियक डेथ का पारिवारिक इतिहास हो।
  • व्यक्ति बार-बार बेहोश होते हैं या बेहोशी की घटनाएं बढ़ रही हैं।
  • अधिक उम्र के व्यक्ति में बेहोशी का पहला मामला - पहली बार हुई बेहोशी की डॉक्टर द्वारा जांच करवा लेनी चाहिए - डॉक्टर शारीरिक परीक्षण, ब्लड टेस्ट और ज़रूरत पड़ने पर इमेजिंग कर सकते हैं)।
  • डायबिटीज़ (मधुमेह) या अन्य मेटाबॉलिक/ एंडोक्राइन विकार। जैसे कि, डायबिटीज़ और उसकी दवाओं के कारण व्यक्ति की रक्त शर्करा स्तर के गिरने (हाइपोग्लाइसीमिया) का जोखिम है, जिस से बेहोशी हो सकती है।
  • गर्भवती होना ।
  • ज़्यादा पसीना आने, उल्टी, दस्त, या कुछ दवाओं (जैसे डाइयूरेटिक्स) के कारण इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन।

डॉक्टर क्या करेंगे?

डॉक्टर परिवार के देखभाल करने वालों से व्यक्ति का मेडिकल इतिहास पूछेंगे। वे बेहोश होने की घटना के गवाहों से घटना-संबंधी प्रश्न पूछेंगे। फिर वे व्यक्ति के वाइटल साइन (रक्त-चाप, नब्ज, सांस लेने का दर आदि) की जांच करेंगे।

फिर डॉक्टर सवालों द्वारा व्यक्ति की मौखिक प्रतिक्रिया का आकलन करेंगे, और आंखों के खुलने और मांसपेशियों की प्रतिक्रियाओं की जांच करेंगे। इस आकलन के आधार पर, वे इलेक्ट्रोलाइट्स, ब्लड शुगर और अन्य सामान्य मापदंडों के लिए ब्लड टेस्ट लिख सकते हैं, और/या न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का पता लगाने के लिए सीटी स्कैन, कार्डियक समस्याओं के लिए ईसीजी/ ईको और उचित लगे तो सीजर की जांच के लिए ईईजी करवा सकते हैं।

बेहोशी से कैसे बचें?

“FAST” 

  • तरल पदार्थ और नमक- पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ और नामक का सेवन करें, खासकर जब ज्यादा गर्मी में जा रहे हों या कसरत के दौरान, क्योंकि इन में ज्यादा पसीना आ सकता है जिससे सोडियम कम हो सकता है और उस से ब्लड प्रेशर कम हो जाता है जिस से बेहोशी हो सकती है।
  • ट्रिगर्स से बचें- लंबे समय तक खड़े रहने से बचें (खासकर गर्मी में या भीड़-भाड़ वाली जगहों पर), निर्जलीकरण से बचें, भोजन समय पर लेते रहें, अचानक बैठने/ लेटने की स्थिति को बदलने से बचें (जैसे कि बहुत तेज़ी से खड़े होना), साथ ही भावनात्मक तनाव, दर्द, थकान और भूख से भी बचें।
  • आसन धीरे-धीरे बदलें- लेटने या बैठने की स्थिति से अचानक खड़े होने से बचें। हमेशा पहले करवट लें और फिर धीरे से उठकर 1-2 मिनट तक अपने पैर ज़मीन पर रखें, उसके बाद धीरे-धीरे खड़े हों।
  • यदि बेहोशी से पहले वाले लक्षण का अनुभव हो, तो ये संकेत दिखने पर मांसपेशियों को कसें- बैठकर अपने सिर को घुटनों के बीच रखें या ऐसी अन्य क्रियाएं करें जिन से रक्तचाप बढ़ सके। ऐसे आसन अपनाएं जिन में मांसपेशियाँ स्वाभाविक रूप से कसी जाती हैं, जैसे कि आलथी-पालथी मारकर बैठना और साथ ही मांसपेशियाँ कसना, हाथों से कसकर कुछ पकड़ना/ दबाना (रबर की गेंद को दबाना या दोनों हाथों की मुट्ठी कसकर बांधना)। ये तरीके ब्लड प्रेशर को तेज़ी से बढ़ाते हैं और बेहोशी को रोक सकते हैं।

चेतना खोना (चाहे वह साधारण बेहोशी हो या किसी अधिक जटिल चिकित्सीय स्थिति की वजह से), शरीर की ओर से एक संकेत है कि किसी चीज़ पर ध्यान देने की ज़रूरत है। यदि हम इसके ट्रिगर्स, शुरुआती चेतावनी के संकेतों और लाल झंडों को समझें तो हमें इस स्थिति में शांत और ज़िम्मेदारी से प्रतिक्रिया देने में मदद मिलेगी। ज़्यादातर बेहोशी के मामले मामूली होते हैं और जल्दी ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखने से हमें सुरक्षित रखने में मदद मिलती है - जैसे कि शरीर में पानी की कमी न होने देना, सही मुद्रा (आसन, पोशचर) के प्रति जागरूक रहना, और ज़रूरत पड़ने पर समय पर डॉक्टरी जाँच करवाना। हमें यह समझना चाहिए कि हमारा शरीर हमें क्या संकेत देने की कोशिश कर रहा है, और यह याद रखना कि यह समझ न केवल हमारी अपनी सुरक्षा को मज़बूत करती है, साथ ही ऐसी घटनाओं में दूसरों की मदद करने की हमारी सामूहिक क्षमता को भी बढ़ाती है।

रेफरेंस:

  1. Bauer, Zaith A., et al. “Unconscious Patient.” PubMed, StatPearls Publishing, 2023, www.ncbi.nlm.nih.gov/books/NBK538529/.
  2. Cleveland Clinic. “Syncope.” Cleveland Clinic, 3 Nov. 2022, my.clevelandclinic.org/health/diseases/17536-syncope.
  3. Kahn, April. “First Aid for Unconsciousness.” Healthline, Healthline Media, 20 Dec. 2017, www.healthline.com/health/unconsciousness-first-aid.
  4. Mayo Clinic. “Fainting: First Aid.” Mayo Clinic, 2018, www.mayoclinic.org/first-aid/first-aid-fainting/basics/art-20056606.
  5. MedlinePlus. “Unconsciousness - First Aid: MedlinePlus Medical Encyclopedia.” Medlineplus.gov, 2016, medlineplus.gov/ency/article/000022.htm.
  6. “Unconsciousness - an Overview | ScienceDirect Topics.” Www.sciencedirect.com, www.sciencedirect.com/topics/medicine-and-dentistry/unconsciousness.
Changed
02/Jul/2026

Stories

  • 6 Easy Ways to Prevent Diabetes [Infographic]
    Dr Anoop Misra, Chairman National Diabetes, Obesity and Cholesterol Foundation (N-DOC0 says diabetes is 80% dependent on lifestyle.  Genes need to interact with the environment for expression. Even if a gene for diabetes is present in an individual, healthy lifestyle can alter gene expression in a favourable manner.    
  • Profile pic of Jimmy Ong, a person with diabetes
    Hypoglycaemia: The highs and the lows
    Jimmy Ong from Singapore relates his personal experiences of being a patient with Type 1 Diabetes and suffering frequent bouts of hypoglycaemia to learn diabetes management the hard way Early Diagnosis  I was diagnosed as a Type 1 diabetic in June 1979 at the age of 28 when I also happened to be overweight. At the time of diagnosis, I had very high glucose in my blood, a count of about 23.  Symptoms  I was urinating abnormally and drinking liquid excessively. I used to wake up a…
  • Me and my epilepsy
    Do not let epilepsy scare your dreams away. This spunky advice comes from 25-year-old Ishira Bubber as she recounts her struggle with epilepsy, unpredictable seizures, loss of childhood and dependence on dozen tablets. Have you ever wondered what it would feel like, being alive, but not living for a few seconds? Trying to remember what happened, but just cannot. How many of you have experienced this? I have. Not once, not twice, but many times; sometimes 100 times a day. …
  • Post Card From A Home Far Away
    Arun M Sivakrishna's father did not smoke or drink, nor did he chew tobacco. He still got oral cancer. Arun shares a poem from his collection "Songs of a Solitary Tree" My dad had oral cancer as well other ailments related to heart conditions and diabetes. He lost his left jaw bone. The irony is he never used to smoke or chew tobacco or drink. He had an abscess in the liver that was operated. He joked to me: "you smoke, I gave my jaw..you drink and I had to give my liver"..…
  • How diabetes affects your sex life
    Many people with diabetes encounter difficulties with sex but are hesitant to address them. Some of you have asked us anonymously. Diabetologist Dr Rajiv Kovil from Mumbai offers some information and advice. Sexual problems (sexual dysfunction) are common among people with diabetes. Both men and women with diabetes experience sexual difficulties as a result of complications from the disease. How common is the problem? Although no official statistics are available for the extent…
  • Top foods to lower your cholesterol
    There are many tasty, low-cholesterol foods available in hawker centres for you to enjoy while dining out. Just make the right choice recommends nutritionist Kohila Govindaraju. Living with high cholesterol? Confused what to eat in food court? Highly concerned about your saturated fat and cholesterol and planning to shift to low-fat foods? Research has proved that eating saturated fats and trans fat can elevate the blood cholesterol level that links to increased risk of heart…
  • Picture of people in an aqua therapy class
    Aqua therapy - a fitness solution beyond joint pains
    Struggling with joint aches and pains and not able to exercise. Is Aqua Therapy an option for you? PatientsEngage speaks to Mumbai-based Deepali Jain, a certified aqua specialist and fitness expert and Sucheta Talwar who conquered fear of water and severe arthritis with aqua therapy.  What is Aqua Therapy? Aqua Therapy is a specialized form of water-based exercises and work outs for relaxation, fitness, health benefits and rehabilitation. It refers to the use of water for…
  • Winter Indian diet myth
    4 Winter Diet Myths addressed
    Did you know an individual gains an average of 2-5 Kgs in winter? Winter is a season of indulgences pushing us often to have food loaded with calories. Dietician and diabetes educator, Ujjwala Baxi tells us how to enjoy the winter without gaining weight. Come winter, the season of mist and mellow fruitfulness, and we tend to gear up for both warm clothes as well as those mouthwatering season-specials that make every nippy evening worth its while. We throw our calorie-consciousness to the winds…
  • All you need to know about cholesterol and your diet
    Are eggs off-limits? How to make sense of the numbers on ‘low-cholesterol’ packaged foods? Is extra virgin coconut oil all it is made out to be? These and other questions answered by nutritionist Kohila Govindaraju  Does our body need cholesterol? The surprising answer is Yes! Cholesterol, a fatty substance that circulates in the blood is an important component of human cells. It is often viewed as an all-out villain, but our body needs some amount of cholesterol to…
  • 3 Simple Steps to Manage Diabetes E-book
    A lot people find managing Diabetes on a day to day basis very difficult. But there is no need to worry. Here we have drawn from the experiences of those with diabetes and provided you tips to understand and manage your diabetes https://www.patientsengage.com/personal-voices/diabetes-has-kept-me-healthy https://www.patientsengage.com/personal-voices/focus-exercise-and-diet-control Click on the image below, login or register and download 3 Simple Steps To Diabetes Management Click on the image…