Skip to main content
Submitted by PatientsEngage on 9 August 2026
Stock pic of a Cardiac Pacemaker with text overlay on blue strip Cardiac Pacemaker FAQ

दुनिया भर में हर साल हृदय गति को नियंत्रित करने में मदद के लिए 10 लाख से ज़्यादा परमनेंट पेसमेकर (स्थायीगतिप्रेरक) लगाए जाते हैं। जर्मनी में हर साल लगभग 1,00,000 पेसमेकर लगाए जाते हैं, जबकि भारत में यह संख्या सिर्फ 20,000 से थोड़ी ज़्यादा है। इस लेख में पेशेंट्सएंगेज की टीम पेसमेकर से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवालों के जवाब देती है ताकि लोगों को सही जानकारी मिले और वे उसके आधार पर फ़ैसले ले सकें।

पेसमेकर क्या है?

पेसमेकर एक छोटा सा उपकरण (डिवाइस) है जिसका इस्तेमाल तब किया जाता है जब हमारी हृदय कि गति (हार्ट रेट) सामान्य से कम हो जाती है - इसे ब्रैडीकार्डिया (हृद्मंदता)कहते हैं। इस उपकरण को सर्जरी के ज़रिए छाती या पेट में लगाया जाता है, जहाँ से यह हृदय को इलेक्ट्रिक सिग्नल भेजता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि हृदय की गति स्थिर और सामान्य सीमा में रहे। सिग्नल अकसर तारों द्वारा भेज जाता है, जिन्हें लीड/ लीड्स कहते हैं, पर कुछ पेसमेकर बिना तारों के काम करते हैं।

Read in English: Cardiac Pacemaker FAQ

हमारा हृदय इलेक्ट्रिक एक्टिविटी के ज़रिए काम करता है। हृदय का जो हिस्सा हृदय की धड़कन को बेहतर ढंग से नियंत्रित रखता है, वह साइनोएट्रियल नोड है, जिसे "नेचुरल पेसमेकर" कहा जाता है। कभी-कभी,साइनोएट्रियल नोड ठीक से काम नहीं करता और हृदय में जाने वाले इलेक्ट्रिक सिग्नल में रुकावट पैदा करता है। ऐसे मामलों में, व्यक्ति की धीमी हार्ट रेट को वापस सामान्य और स्थिर गति पर लाने के लिए पेसमेकर की ज़रूरत पड़ सकती है।

पेसमेकर कहाँ लगाया जाता है और यह कितना बड़ा होता है?

  • पेसमेकर बहुत छोटे उपकरण होते हैं और लगभग 5 × 4 सीएम के होते हैं, और इनकी मोटाई 6 से 7 एमएम होती है। कभी-कभी पेसमेकर का आकार त्वचा के नीचे से दिखाई देता है। इसे आमतौर पर कॉलरबोन के ठीक नीचे, त्वचा में एक छोटा सा चीरा बनाकर लगाया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान होने वाले दर्द या परेशानी से बचने के लिए इसे लोकल एनेस्थीसिया देकर किया जाता है। इसे जनरल एनेस्थीसिया देकर भी लगाया जा सकता है, हालाँकि ऐसा कम ही होता है। ऐसा तब किया जाता है जब इसके तार (लीड) हृदय के बाहरी हिस्से से जोड़े जाने हों (जिसके लिए पसलियों के नीचे एक छोटा चीरा लगाना पड़ता है - यह ज़्यादातर बच्चों में या हृदय की दूसरी सर्जरी के दौरान किया जाता है) या जब मरीज़ बहुत ज़्यादा घबराए हुए हों।

कार्डियक पेसमेकर किन स्थितियों के इलाज के लिए उपयुक्त है?

कुछ स्थितियों में हृदय की धड़कन सामान्य के मुकाबले धीमी हो जाती है, और उसे फिर से सामान्य स्तर पर लाने के लिए पेसमेकर की मदद की ज़रूरत पड़ती है। वे स्थितियाँ हैं:

  • साइनस नोड की बीमारी
  • हार्ट में ब्लॉक (रुकावट)
  • पहले कभी हार्ट अटैक आया हो
  • लॉन्ग क्यूटी सिंड्रोम
  • हाइपरट्रॉफिक ऑब्सट्रक्टिव कार्डियोमायोपैथी (यहाँ अधिक पढ़ें)
  • डाइलेटेड कार्डियोमायोपैथी (यहाँ अधिक पढ़ें)
  • टैकीकार्डिया-ब्रैडीकार्डिया
  • सिंड्रोमक्रोनोट्रोपिक इनकम्पिटेंस
  • कार्डियक रीसिंक्रोनाइज़ेशन थेरेपी
  • बार-बार बेहोश होना (कैरोटिड साइनस सिंड्रोम) (यहाँ अधिक पढ़ें)
  • आराम की स्थिति में हृदय की धड़कन 60 बीट प्रति मिनट से कम होना
  • एट्रियल फाइब्रिलेशन
  • कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़ (यहाँ अधिक पढ़ें)
  • जन्मजात हार्ट डिफेक्ट (यहाँ अधिक पढ़ें)
  • हार्ट फेलियर (सिर्फ़ बाइवेंट्रिकुलर पेसमेकर के लिए)

पेसमेकर के प्रकार

  • सिंगल-चैंबर पेसमेकर: इस प्रकार के पेसमेकर में एक ही लीड होती है जो या तो दाएं एट्रियम (आलिंद) या दाएं वेंट्रिकल (निलय) तक इलेक्ट्रिकल सिग्नल भेजती है।
  • डुअल-चैंबर पेसमेकर: इसमें दो लीड होती हैं - एक दाएं एट्रियम में और दूसरी दाएं वेंट्रिकल में - ताकि हृदय की धड़कन को बेहतर ढंग से कंट्रोल किया जा सके।
  • बाइवेंट्रिकुलर पेसमेकर: इसे कार्डियक रीसिंक्रोनाइज़ेशन थेरेपी डिवाइस भी कहा जाता है। यह उपकरण तीन लीड का इस्तेमाल करता है ताकि दोनों वेंट्रिकल में एक साथ संकुचन हो सके। इनका इस्तेमाल मुख्य रूप से हार्ट फेलियर के मरीज़ों के लिए किया जाता है।
  • लीडलेस (बिना लीड वाला) पेसमेकर: यह एक छोटा, खुद में पूरा (सेल्फ-कंटेंड) उपकरण है जिसे बिना किसी लीड के सीधे हृदय में लगाया जाता है। इसका फ़ायदा यह है कि इसमें इन्फेक्शन का खतरा कम होता है और मरीज़ जल्दी ठीक हो जाते हैं।
  • रेट-रिस्पॉन्सिव पेसमेकर: यह मरीज़ की शारीरिक गतिविधि के आधार पर हृदय की गति को अपने-आप एडजस्ट करता है।

क्या पेसमेकर लगाने के ऑपरेशन के दौरान हृदय को रोकना पड़ता है?

नहीं, पेसमेकर ऑपरेशन के दौरान हृदय को रोकने की ज़रूरत नहीं होती है।

क्या मरीज को पेसमेकर का एहसास होता है?

शुरुआत में, छाती में उपकरण का वज़न महसूस हो सकता है, लेकिन धीरे-धीरे ज़्यादातर लोग इसके आदी हो जाते हैं। कभी-कभी लोग त्वचा के नीचे पेसमेकर को देख या महसूस भी कर सकते हैं, हालाँकि समय के साथ यह कम दिखाई देने लगता है। वास्तव में, पेसमेकर के काम करने का एहसास नहीं होता है क्योंकि इससे भेजे जाने वाले इलेक्ट्रिकल सिग्नल बहुत कमज़ोर होते हैं और ऐसे डिजाइन किए जाते हैं कि मरीज़ को उनका पता न चले।

इसे लगाने की प्रक्रिया में क्या जोखिम हैं?

पेसमेकर लगाने की प्रक्रिया आमतौर पर कम-जोखिम वाली होती है। सिर्फ लगभग 100 में से 1 व्यक्ति को प्रक्रिया के दौरान या उसके तुरंत बाद गंभीर जटिलताओं का सामना करना पड़ता है। हालांकि जटिलताएं बहुत कम लोगों में देखी जाती हैं, फिर भी प्रक्रिया के तुरंत बाद कुछ बातों के प्रति सतर्क रहनया चाहिए:

  1. उपकरण लगाने की जगह पर इन्फेक्शन
  2. खून बहना या चोट का निशान पड़ना
  3. इस्तेमाल की गई चीज़ों से एलर्जी होना
  4. रक्त वाहिकाओं या तंत्रिकाओं (नर्व्स) को नुकसान पहुँचना
  5. लीड का अपनी जगह से हट जाना या टूट जाना

अन्य जटिलताओं में हृदय के आस-पास रक्त स्राव होना, एक तरफ का फेफड़ा पिचक जाना, या अपनी जगह पर ठीक से सुरक्षित करने के बाद भी लीड्स का हिल जाना शामिल हो सकता है, लेकिन इन सभी स्थितियों का इलाज किया जा सकता है।

पेसमेकर सर्जरी के बाद ठीक होने में कितना समय लगता है?

पेसमेकर सर्जरी के बाद पूरी तरह ठीक होने में आमतौर पर 4 से 6 हफ़्ते लगते हैं। ज़्यादातर लोग 3 से 7 दिनों में अपनी रोज़मर्रा की गतिविधियाँ फिर से शुरू कर सकते हैं, लेकिन चीरे वाली जगह के पूरी तरह ठीक होने और लीड्स के सही तरह से सेट होने में आमतौर पर ज़्यादा समय लगता है।

फॉलो-अप अपॉइंटमेंट की कितनी बार ज़रूरत होती है?

पेसमेकर को लगाने के अगले दिन और फिर छह हफ़्ते बाद चेक किया जाता है। उसके बाद इसे हर साल चेक किया जाएगा। फॉलो-अप अपॉइंटमेंट के दौरान, डॉक्टर पेसमेकर के डिस्चार्ज रेट को देखते हैं, इलेक्ट्रिकल इम्पल्स की ताकत मापते हैं, और हृदय पर इम्पल्स के असर को रिकॉर्ड करते हैं।

ज़्यादातर पेसमेकर की बैटरी 6 से 10 साल तक चलती हैं, जिसके बाद बैटरी बदलने की ज़रूरत पड़ सकती है। जैसे-जैसे बैटरी की उम्र खत्म होने लगती है (5-15 साल बाद), डॉक्टर से चेक-अप के लिए ज़्यादा बार (हर 1 से 3 महीने में) जाना पड़ सकता है।

क्या पेसमेकर को समय-समय पर एडजस्ट करने की ज़रूरत होती है?

हाँ, फ़ॉलो-अप अपॉइंटमेंट के दौरान कार्डियोलॉजिस्ट द्वारा पेसमेकर की जाँच और एडजस्टमेंट करवाना ज़रूरी होता है। फ़ॉलो-अप अपॉइंटमेंट में यह देखा जाता है कि क्या पेसमेकर ठीक से काम कर रहा है, बैटरी ठीक है और सेटिंग्स मरीज़ की स्थिति के हिसाब से सही हैं।

एडजस्टमेंट 'प्रोग्रामर' नाम के एक बाहरी कंप्यूटराइज़्ड उपकरण से किया जाता है। मैग्नेटिक या रेडियो सिग्नल के ज़रिए पेसमेकर से संपर्क करने के लिए छाती पर एक "वांड" रखा जाता है। एडजस्टमेंट के दौरान इनमें से कोई एक चीज़ हो सकती है:

सेटिंग्स को रीप्रोग्राम करना: अगर किसी की मेडिकल स्थिति या जीवनशैली बदल गई है (जैसे कि व्यक्ति पहले से ज़्यादा या कम एक्टिव हो गए हैं), तो पेसिंग रेट में बदलाव करना।

बैटरी की लाइफ़ चेक करना: यह इसलिए किया जाता है ताकि पता चल सके कि बैटरी कितने साल और चलेगी और उसे बदलने की योजना बनाई जा सके।

पेसमेकर की लीड्स की निगरानी: इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलती है कि क्या लीड्स अभी भी मज़बूती से जुड़े हुए हैं और सही इलेक्ट्रिकल रेजिस्टेंस के साथ काम कर रहे हैं।

पेसमेकर को कब बदलना पड़ता है?

पेसमेकर को तब बदलना पड़ता है जब उसकी बैटरी खत्म होने वाली होती है; ऐसा आमतौर पर हर 5 से 15 साल में होता है। चूंकि बैटरी पेसमेकर के अंदर पूरी तरह सील होती है, इसलिए इसे बदलने के लिए पूरे मेटल बॉक्स (जेनरेटर) को बदलने की जरूरत होती है।

पेसमेकर लगवाने के बाद क्या करना चाहिए और क्या नहीं?

प्रक्रिया के तुरंत बाद, घाव के ठीक होने तक उसे गीला नहीं होने देना चाहिए। घाव पर एक ड्रेसिंग लगी होगी, जिसे सूखा रखना ज़रूरी है।

  • छह हफ़्तों तक किसी भी तरह की जोर लगाने वाली गतिविधि से बचना चाहिए (जैसे खेल-कूद, भारी चीज़ें उठाना, धकेलना या खींचना)।
  • किसी भी मेडिकल प्रक्रिया से पहले संबंधित डॉक्टर या डेंटिस्ट को पेसमेकर के बारे में ज़रूर बताना चाहिए।
  • हमेशा अपने साथ पेसमेकर का पहचान पत्र (आईडी कार्ड) रखना चाहिए।
  • सभी सेल फ़ोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को पेसमेकर से कम से कम 6 इंच दूर रखना चाहिए।
  • कार्डियोलॉजिस्ट की बताई दवाइयों और जीवनशैली से जुड़े सुझावों का सख्ती से पालन करना चाहिए।

पेसमेकर के खराब होने के क्या लक्षण हैं?

अगर किसी को ये लक्षण महसूस हों,तो वे जान सकते हैं कि उनका पेसमेकर खराब हो रहा है:

  1. चक्कर आना
  2. सीने में दर्द
  3. हृदय की धड़कन का अनियमित होना
  4. थकान
  5. हृदय की धड़कन का तेज़ होना

कुछ अन्य लक्षण जिनके लिए तुरंत मेडिकल मदद की ज़रूरत होती है और जिनके लिए डॉक्टर को तुरंत दिखाना चाहिए, वे हैं:

  1. लगातार हिचकी आना
  2. पेट या छाती की मांसपेशियों में फड़कन
  3. सर्जरी वाली जगह पर दर्द, सूजन और लालिमा
  4. ऐसा महसूस होना कि त्वचा के नीचे बनी पॉकेट में जनरेटर ढीला है

क्या पेसमेकर पर बिजली के उपकरणों का असर पड़ता है?

अगर कोई चीज़ मज़बूत इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फ़ील्ड बनाती है, वह पेसमेकर के काम करने में रुकावट डाल सकती है।

घर में इस्तेमाल होने वाले आम बिजली के उपकरण (जैसे हेयर ड्रायर और माइक्रोवेव ओवन)

अगर इन्हें पेसमेकर से कम से कम 15 सीएम दूर इस्तेमाल किया जाए, तो इनसे कोई दिक्कत नहीं होती। इंडक्शन हॉब के मामले में,स्टोव टॉप और पेसमेकर के बीच कम से कम 60cm की दूरी बनाए रखनी चाहिए। या स्टोव के पीछे वाले बर्नर का इस्तेमाल करें। आप इन तरीकों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं:

  • सही साइज़ के बर्तन का इस्तेमाल: जब बर्तन इंडक्शन कॉइल को पूरी तरह से ढक लेता है, तो मैग्नेटिक फ़ील्ड अंदर ही रहता है। लोगों को सलाह दी जाती है कि वे कुकिंग ज़ोन के साइज़ के हिसाब से बर्तन इस्तेमाल करें, ताकि फ़ील्ड बाहर न फैले।
  • थोड़ा पीछे हटकर काम करना: कई लोग काउंटर पर झुकने के बजाय हॉब से थोड़ा पीछे खड़े होकर और लंबे हैंडल वाले चम्मच से खाना चलाते हैं।
  • अलग टेक्नोलॉजी चुनना: पेसमेकर वाले कई लोग किसी भी तरह के जोखिम से बचने के लिए इंडक्शन के बजाय सिरेमिक/हैलोजन या गैस हॉब लगवाना पसंद करते हैं।
  • मॉडर्न उपकरण टेक्नोलॉजी: पुराने मॉडल्स की तुलना में मॉडर्न पेसमेकर आमतौर पर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंटरफेरेंस से बेहतर तरीके से सुरक्षित होते हैं, जिससे इनके ठीक से काम न करने का जोखिम कम हो जाता है।

मोबाइल फ़ोन
मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल करना तब तक सुरक्षित है जब तक इसे पेसमेकर से 15 सीएम से ज़्यादा दूर रखा जाए। किसी भी हेडसेट या इन-ईयर का इस्तेमाल पेसमेकर वाली साइड के दूसरी तरफ़ करना चाहिए।

शॉप सिक्योरिटी सिस्टम
मेटल डिटेक्टर से गुज़रने पर पेसमेकर पर कोई असर नहीं पड़ता, लेकिन इस तरह के सिक्योरिटी संबंधी उपकरण के बहुत पास ज़्यादा देर तक खड़ा नहीं रहना चाहिए।

एयरपोर्ट सिक्योरिटी सिस्टम
एयरपोर्ट सिक्योरिटी सिस्टम से आम तौर पर पेसमेकर में कोई दिक्कत नहीं आती, लेकिन व्यक्ति को अपना पेसमेकर पहचान पत्र (आइडेंटिफ़िकेशन कार्ड) साथ रखना चाहिए और सिक्योरिटी स्टाफ़ को बताना चाहिए कि उन्होंने पेसमेकर लगाया हुआ है।

क्या पेसमेकर लगाने से सेक्स लाइफ पर असर पड़ता है?

पेसमेकर लगवाने के बाद ठीक होने पर नॉर्मल सेक्स लाइफ फिर से शुरू की जा सकती है, लेकिन ठीक होने के शुरुआती 4 हफ़्तों तक ऐसी पोज़िशन से बचना चाहिए जिनसे हाथों और छाती पर दबाव पड़े। सेक्स की वजह से हार्ट अटैक आने का रिस्क कम होता है (लगभग 10 लाख में से 1)।

क्या पेसमेकर लगवाने के बाद सफ़र किया जा सकता है?

अगर डॉक्टर इजाज़त दें, तो हवाई जहाज़ या कार से सफ़र करना ठीक माना जाता है। एयरपोर्ट सिक्योरिटी डिटेक्टर आम तौर पर सुरक्षित होते हैं। अगर हैंडहेल्ड वांड से चेकिंग की जा रही हो, तो चेकर को बता दें कि इन वांड्स को पेसमेकर वाली जगह पर कुछ सेकंड से ज़्यादा देर तक न रखा जाए।

क्या पेसमेकर के साथ एक्सरसाइज़ की जा सकती है?

पूरी तरह ठीक होने के बाद - जिसमें सर्जरी के बाद आम तौर पर लगभग 4-6 हफ़्ते लगते हैं - ज़्यादातर लोग ये चीज़ें कर सकते हैं:

  • एरोबिक गतिविधियाँ: तेज़ी से चलना, जॉगिंग, स्टेशनरी साइक्लिंग और डांसिंग।
  • तैराकी: लीड्स के स्थिर होने के लिए 6-12 हफ़्ते इंतज़ार करने के बाद तैराकी की सलाह जरूर दी जाती है, क्योंकि तैराकी में शरीर पर कम ज़ोर पड़ता है।
  • हल्की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग: भारी वज़न उठाने के बजाय, हल्के वज़न या रेजिस्टेंस बैंड का इस्तेमाल करके ज़्यादा बार (15 से ज़्यादा बार) कसरत करना हृदय के लिए ज़्यादा सुरक्षित है।

किन चीज़ों से बचें

  • सीने में आघात के उच्च जोखिम वाले खेल, जैसे फुटबॉल, मुक्केबाजी, मार्शल आर्ट या कुश्ती से बचें, क्योंकि सीधा प्रहार पेसमेकर को नुकसान पहुंचा सकता है।
  • टेनिस, वॉलीबॉल, या गोल्फ जैसे खेलों से सावधान रहें क्योंकि बार-बार, ज़ोरदार हाथ झुलाने से लंबे कभी-कभी पेसमेकर को नुकसान हो सकता है।
  • पहले 6 हफ्तों के लिए 10-15 पाउंड से अधिक वजन वाली वस्तुओं को उठाने या ओवरहेड लिफ्ट करने से बचें।

क्या कसे हुए कपड़े पहनना समस्या हैं?

  • रिकवरी के शुरुआती 4 से 12 हफ़्तों के दौरान, पेसमेकर लगवाने वाले मरीज़ों के लिए छाती के ऊपरी हिस्से और कंधों पर कसे हुए कपड़े पहनना परेशानी का कारण बन सकता है। ऐसे कपड़े पेसमेकर को तो कोई नुकसान नहीं पहुँचाते, लेकिन इनसे काफ़ी दर्द हो सकता है, चीरे वाली जगह पर रगड़ लग सकती है और घाव भरने में देरी हो सकती है। ऐसे कपड़ों की वजह से हाथ और कंधे की हरकत में भी रुकावट आ सकती है; वैसे भी, लीड्स को खिंचने से बचाने के लिए शुरुआती कुछ हफ़्तों में इनकी हरकत पहले से ही सीमित रखी जाती है।

कपड़ों में बदलाव करके भी उनका इस्तेमाल किया जा सकता है, जैसे:

  • शुरुआती कुछ हफ़्तों में, आप ढीली-ढाली, मुलायम या बिना तार वाली (वायरलेस) ब्रा पहन सकती हैं।
  • अगर ब्रा का स्ट्रैप चुभता है या परेशानी देता है, तो चीरे वाली जगह पर कॉटन पैड जैसा कोई छोटा, मुलायम पैड रखना फ़ायदेमंद हो सकता है।
  • कपड़े पहनते समय हाथों को सिर के ऊपर उठाने से बचने के लिए बटन वाली शर्ट, ढीले टॉप या सामने ज़िप वाली जैकेट पहनने की सलाह दी जाती है।
  • कुछ कंपनियाँ ऐसे स्पोर्ट्स टॉप बनाते हैं जिनमें उपकरण की सुरक्षा के लिए छाती के हिस्से में पहले से ही पैडिंग लगी होती है।

व्यक्ति दोबारा टाइट कपड़े कब पहन सकता है?

आमतौर पर, जब डॉक्टर यह पुष्टि कर लें कि चीरा पूरी तरह से ठीक हो गया है और संक्रमण का कोई लक्षण नहीं है (जिसमें कुछ हफ़्ते लगते हैं), तो आप फिर से सामान्य और थोड़े कसे हुए कपड़े पहनना शुरू कर सकते हैं।

बच्चों के लिए पेसमेकर:
बच्चों के लिए पेसमेकर खास तरह के,जान बचाने वाले उपकरण होते हैं। इन्हें शिशुओं, बच्चों और किशोरों में तब लगाया जाता है जब जन्म से मौजूद हृदय की खराबी हो या किसी सर्जरी के दौरान हुए नुकसान की वजह से हृदय की धड़कन असामान्य रूप से धीमी हो जाती है। पेसमेकर कभी-कभी एएए बैटरी से भी छोटे हो सकते हैं। बड़ों में इस्तेमाल होने वाले पेसमेकर की तरह ही, ये भी हृदय को ठीक से काम करने के लिए इलेक्ट्रिकल सिग्नल भेजते हैं। बच्चे की उम्र के हिसाब से इन्हें लगाने की जगह अलग-अलग होती है। नवजात शिशुओं में इन्हें अक्सर पेट में लगाया जाता है और इनके लीड हृदय की सतह पर जुड़े होते हैं, जबकि किशोरों में इन्हें आमतौर पर कंधे के नीचे लगाया जाता है।
बच्चों में पेसमेकर लगाने की ज़रूरत कब पड़ती है:
बच्चों में पेसमेकर लगाने के सबसे आम कारण हैं - थर्ड-डिग्री एट्रियोवेंट्रिकुलर (एवी) ब्लॉक, जन्मजात हृदय रोग, साइनस नोड की खराबी और कुछ विरल मामलों में, सर्जरी के बाद होने वाली जटिलताएँ।
 
बच्चों में पेसमेकर लगाने के बाद क्या उम्मीद की जा सकती है?
  • सर्जरी के बाद थोड़ा दर्द या तकलीफ होना आम बात है, लेकिन इसे एसिटामिनोफेन या आइबुप्रोफेन जैसी आसानी से मिलने वाली दवाओं से संभाला जा सकता है।
  • पेसमेकर वाले बच्चे आम तौर पर अपनी सामान्य गतिविधियां फिर से शुरू कर सकते हैं, हालांकि उपकरण को सुरक्षित रखने के लिए कॉन्टैक्ट स्पोर्ट्स (जैसे फुटबॉल या कुश्ती) पर रोक लगानी पड़ सकती है।
  • पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट नियमित रूप से पेसमेकर और बैटरी की लाइफ की जांच करेंगे और बच्चे के विकास के हिसाब से सेटिंग्स में बदलाव करेगा।

क्या पेसमेकर होने पर एमआरआई करवाई जा सकती है?

पेसमेकर लगे होने पर, ऐसे उपकरणों से दूर रहना चाहिए जिनमें बड़े मैग्नेट हों या जिनसे मैग्नेटिक फ़ील्ड बनती हो, जैसे कि कार या नाव की मोटर। एमआरआई एक इमेजिंग टेस्ट है जिसमें मैग्नेट का इस्तेमाल होता है। आजकल ज़्यादातर पेसमेकर के साथ एमआरआई करवाने की मंज़ूरी होती है। लेकिन यह पक्का करने के लिए कि यह सुरक्षित है, पहले अपने डॉक्टर से बात कर लेनी चाहिए। दूसरी मशीनों से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंटरफ़ेरेंस हो सकता है, जो पेसमेकर के सामान्य कामकाज पर असर डाल सकता है।

अगर पेसमेकर से बीप की आवाज़ सुनाई दे, तो क्या करना चाहिए?

तुरंत अपने कार्डियोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए। यह पेसमेकर में किसी ऐसी समस्या का संकेत हो सकता है जिस पर तुरंत ध्यान देने की ज़रूरत है।

References

  1. Ayuda, Tiffany. “Exercise with a Pacemaker: How to Work out Safely.” EverydayHealth.com, 2025, www.everydayhealth.com/recovery-safety/exercises-with-a-pacemaker/.
  2. British Heart Foundation. “Frequently Asked Pacemaker Questions.” Bhf.org.uk, British Heart Foundation, 4 June 2020, www.bhf.org.uk/informationsupport/heart-matters-magazine/medical/how-do….
  3. “FAQ about Pacemakers and Implantable Cardioverter Defibrillators (ICDs) | UMass Memorial Health.” Ummhealth.org, 2024, www.ummhealth.org/health-library/faq-about-pacemakers-and-implantable-c…. Accessed 13 Feb. 2026.
  4. “Frequently Asked Questions about Pacemakers and Implantable Cardioverter Defibrillators (ICDs).” Www.hopkinsmedicine.org, www.hopkinsmedicine.org/health/treatment-tests-and-therapies/frequently….
  5. NHS website. “FAQs.” Nhs.uk, Oct. 2017, www.nhs.uk/tests-and-treatments/pacemaker-implantation/recovery/.
  6. “Pacemakers - after Getting a Pacemaker | NHLBI, NIH.” Www.nhlbi.nih.gov, 24 Mar. 2022, www.nhlbi.nih.gov/health/pacemakers/after.
  7. Remzi Karaoğuz, and Mustafa Şahingeri. “Exercise and Sports Participation in Patients with Cardiac Implantable Electronic Devices.” Turk Kardiyoloji Dernegi Arsivi-Archives of the Turkish Society of Cardiology, 1 Jan. 2025, https://doi.org/10.5543/tkda.2024.24952. Accessed 1 July 2025.
  8. Schoenfeld, Mark. “Cardiac Pacemaker.” Yale Medicine, 2025, www.yalemedicine.org/conditions/cardiac-pacemaker.
  9. sumadmin. “Best Cardiologist in India Answers Your Questions about Pacemaker.” Sum Ultimate | Best Hospitals in Bhubaneswar |, 28 Nov. 2023, sumum.soahospitals.com/blog/best-cardiologist-in-india-answers-all-your-questions-about-pacemaker/. Accessed 13 Feb. 2026.
  10. American Heart Association. “Living with Your Pacemaker.” Www.heart.org, 2016, www.heart.org/en/health-topics/arrhythmia/prevention--treatment-of-arrh….
  11. Bowring, Declan. “Pacemaker Users Advised to Avoid Induction Stoves over Interference Fears Surrounding Magnetic Fields.” Abc.net.au, ABC News, 19 Jan. 2023, www.abc.net.au/news/2023-01-19/pacemaker-users-stay-away-from-induction….
  12. ForHearts Worldwide. “The Truth about Everyday Activities with a Pacemaker.” ForHearts, 28 June 2024, forhearts.org/the-truth-about-navigating-everyday-activities-with-a-pacemaker/. Accessed 17 Feb. 2026.
  13. “Living with a Pacemaker.” GOSH Hospital Site, www.gosh.nhs.uk/conditions-and-treatments/procedures-and-treatments/liv….
  14. “Living with a Pacemaker - Dos & Don’ts for Daily Life.” Heart Rhythm Cardiologist - Dr Jonathan Lyne, 2 May 2025, heartrhythmcardiologist.com/living-with-a-pacemaker-guide/.
  15. “Pediatric Pacemaker and Defibrillator Management - Conditions and Treatments | Children’s National Hospital.” Children’s National Hospital, 2024, www.childrensnational.org/get-care/health-library/pacemaker-implantatio….
  16. Singh, HarinderR, et al. “Pacing in Children.” Annals of Pediatric Cardiology, vol. 6, no. 1, 2013, p. 46, https://doi.org/10.4103/0974-2069.107234.
  17. skeleton. “True.” Pacemaker Club, 2026, www.pacemakerclub.com/message/8685/bra-straps. Accessed 17 Feb. 2026.
  18. Strinati, Marta, and Marta Strinati. “Induction Hobs, Enemies of the Pacemaker? - FoodTimes.” FoodTimes, 7 May 2023, www.foodtimes.eu/consumers-and-health/induction-hobs-enemies-of-the-pac…. Accessed 17 Feb. 2026.
  19. The. “Pediatric Pacemakers & Implantable Cardioverter Defibrillators (ICD).” Children’s Hospital of Philadelphia, 2026, www.chop.edu/treatments/pacemakers-and-implantable-cardioverter-defibri….
  20. “Tiny Pacemakers Safely Stabilize Newborns’ Hearts for up to Two Years.” American Heart Association, 2025, newsroom.heart.org/news/tiny-pacemakers-safely-stabilize-newborns-hearts-for-up-to-two-years.
Changed
22/Aug/2026

Stories

  • The author Dr Kalyani, a heart patient in a red sari and smiling
    कोरोना हो या कोरोनरी (हार्ट अटैक) - खुद को स्वस्थ बनाए रखें
    डॉ। कल्याणी नित्यानंदन, एक 85 वर्षीय कार्डियोलॉजिस्ट, अकेले रहती हैं। इस लेख में वे हमारे साथ साझा करती हैं कि कैसे कार्डियक इमरजेंसी के लिए खुद को तैयार करें और कोविड -19 लॉकडाउन के दौरान खुद को खुश और उत्साहित कैसे रखें। जब तक मेरी माँ वरिष्ठ नागरिक बनने की उम्र तक पहुँचीं, तब तक वे विधवा बन चुकी थीं और वे अपना कोई घर नहीं चला रही थीं। उनके दो बच्चे चेन्नई में ही थे और दो भारत में अन्य जगह थे। वे अपना समय उन के बीच विभाजित कर रही थीं। हर घर में उन्होंने अपने कुछ जोड़ी कपड़े छोड़े हुए थे, और साथ…
  • Staying Afloat During Corona or Coronary Crisis
    Dr Kalyani Nityanandan, 85-year-old cardiologist, who lives independently, shares with us some valuable tips on how to prepare yourself for cardiac emergency and keep spirits up during the Covid-19 lockdown. By the time my mother was a senior citizen she was a widow with no house to run of her own. Two of her children were local in Chennai and the other two were elsewhere in India. She split her time between them. At each house she left a change of clothes, a dinner plate and curved drinking…
  • Side effects and drug interactions of Common Heart Medications - Beta Blockers, Lipid Meds, Diuretics and others
    In the second part of this article on side effects and drug interactions of common heart medications, we cover beta blockers, lipid medications, diuretics, calcium channel blockers and cardiac glycosides. Your doctor can tell you which medications or combination of are best suited for you. The first part is here.  Remember this is not a complete list and if you are taking or planning to take any prescription, dietary, herbal or natural supplements, please consult your Cardiologist or…
  • Side effects and drug interactions of Common Heart Medicines - Anti-coagulants, Vasodialators, Inhibitors and others
    If you have any heart condition, it is likely you will be placed on one of the cardiac medications listed below. Your doctor can tell you which medications or combination of are best suited for you. We have listed the commonly prescribed drugs, their side-effects and drug interactions in two parts. The second part is here. Remember this is not a complete list and if you are taking or planning to take any prescription, dietary, herbal or natural supplements, please consult your Cardiologist or…
  • एथलीट से हृदय रोगी तक का सफर - घटनाओं की ऐसी श्रृंखला जिसे रोका जा सकता था
    49 वर्षीय राहुल अपने जीवन की घटनाओं का बयान एक ऐसे घटना क्रम के रूप में करते हैं जिससे बचा जा सकता था। वे बताते हैं कि किशोरावस्था हमेशा खेलकूद में भाग लेने वाले व्यक्तित्व से वे आज ऐसी अवस्था में पहुंच चुके हैं जहां उन्हें उच्च रक्तचाप और हाइपरलिपिडेमिया के साथ ही हृदय-रोग भी हो गया है। यह सब इसलिए हुआ क्योंकि उन्होंने अपने स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दिया। “इस बीमारी ने मेरा पारिवारिक जीवन बदल दिया और मुझे एक ऐसी जगह लाकर खड़ा कर दिया जहां मैं कभी नहीं चाहता कि कोई भी पहुंचे।” 2 साल पहले मुझे…
  • Image of a person snoring and sleeping with demonstrations of airways being affected
    आपको खर्राटों को कब गंभीरता से लेना चाहिए
    जोर से खर्राटे लेना अकसर एक गंभीर समस्या का लक्षण है जिसे ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया (ओ एस ए) कहते हैं। अगर आप और आपका कोई प्रियजन खर्राटे लेता है तो इस लेख में स्लीप एप्निया पर दी गयी जानकारी आपके लिए बहुत उपयोगी होगी । इलाज के विकल्प भी बताए गए हैं। ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया क्या है? ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया या ओ एस ए (OSA) एक चिकित्सकीय (मेडिकल) समस्या है जिसमें नींद के दौरान अनैच्छिक रूप से, बिना जाने बूझे, सांस बार बार रुक जाती है। ऐसे छोटे-छोटे अंतराल के लिए सांस नहीं ले पाने को…
  • Stock pic of a young women running on the beach with an overlay of a heart and ECG
    महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक के लक्षण और जोखिम
    हिंदुजा हेल्थकेयर सर्जिकल हॉस्पिटल की इंटर्वेंशनॉल कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. स्नेहिल मिश्रा  इस भ्रम को दूर कर रहे हैं कि हृदय रोग केवल पुरुषों का रोग है। सच इसके विपरीत है। महिलाओं में मृत्यु का सबसे बड़ा कारण हृदय रोग  ही है, परन्तु इसके लक्षण महिलाओं में फरक हैं। क्या हृदय रोग पुरुषों की तुलना में महिलाओं के लिए ज्यादा खतरनाक है? जागरूकता की कमी के कारण और केस की सही पहचान और रिपोर्टिंग में कमी के कारण महिलाओं में हृदय रोग का जोखिम सच्चाई से काफी कम आंका गया है। ज्यादातर…
  • कार्डियाक रिहैब से मुझे फिर से अपना जीवन जीने में मदद मिली
    ह्रदय की गति का रुक जाना, वॉल्व का रिप्लेसमेंट या हृदय की सर्जरी के बाद हृद्य को सुदृढ़ करने के लिए कार्डियाक रिहैबिलीटेशन अत्यंत लाभकारी और जीवन को बदल देने वाली प्रकिया है। 71 वर्षीय श्रीकांत शाह अपने कार्डियाक रिहैबिलीटेशन कार्यक्रम के अनुभव को याद करते हैं कि कैसे वे अब सीढ़ियां चढ़ जाते हैं और उनकी सांस भी नहीं फूलती है। मैं कई सालों से हृदय रोगी हूं और मेरे परिवार में हृदयरोग पहले से चलता आ रहा है। हाल ही में दिल का दौरा पड़ने के बाद मेरी बाईपास सर्जरी हुई और एऑर्टिक वॉल्व बदलना पड़ा।…
  • इन 10 नुस्खों से अपने उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करें
    उच्च रक्तचाप को मैनेज करना स्वस्थ बने रहने का एक महत्वपूर्ण पहलू है। उच्च रक्तचाप कई समस्याओं को जन्म दे सकता है - गुर्दे की बीमारी, हृदय रोग, हृद्वाहिका (कार्डियोवैस्कुलर) रोग, वगैरह । इस लेख में हम रक्तचाप के नियंत्रण संबंधी सवालों पर चर्चा कर रहे हैं - जैसे, क्या खाएं? कितना नमक सही है? क्या शराब पीना ठीक है? विटामिन डी का इससे क्या लेना-देना है? इत्यादि। 1.   रक्तचाप को ऊंचा कब माना जाता है? 120/80 mmHg रक्तचाप को सामान्य माना जाता है। 140/90 mmHg या इससे अधिक होने पर रक्तचाप को “…
  • कोलेस्ट्रॉल और आहार के बारे में सब कुछ जाने
    क्या अंडे निषिद्ध हैं? “कम कोलेस्ट्रॉल” वाले खाद्य पदार्थों के पैकेट पर दी गई मात्राओं को कैसे समझें? क्या एक्स्ट्रा वर्जिन नारियल तेल स्वास्थ्य के लिए उतना उत्तम है जितना बताया जाता है? पोषण विशेषज्ञा कोहिला गोविंदाराजू ऐसे कई सवालों के जवाब दे रहीं हैं. क्या हमारे शरीर को कोलेस्ट्रॉल की ज़रूरत है? हैरतअंगेज जवाब है हां! कोलेस्ट्रॉल एक वसायुक्त पदार्थ है जिसका शरीर में रक्त द्वारा संचार होता है. यह मानव कोशिकाओं का एक महत्वपूर्ण भाग है. इसे अकसर खलनायक के रूप में देखा जाता है. लेकिन, हमारे शरीर…